वसीम बरेलवी
शर्तें लगाई जाती नहीं
दोस्ती के साथ
कीजे मुझे क़ुबूल मिरी
हर कमी के साथ
शराफ़तों की यहाँ कोई अहमियत ही नहीं किसी का कुछ न बिगाड़ो तो कौन डरता है
वसीम बरेलवी
तमाम दिन की तलब राह देखती होगी जो ख़ाली हाथ चले हो तो घर नहीं जाना
वसीम बरेलवी
तमाम दिन की तलब राह देखती होगी जो ख़ाली हाथ चले हो तो घर नहीं जाना
वसीम बरेलवी
तिरे ख़याल के हाथों कुछ ऐसा बिखरा हूँ
कि जैसे बच्चा किताबें इधर उधर कर दे
— Crystal Lambert
तुझे पाने की कोशिश में कुछ इतना खो चुका हूँ मैं कि तू मिल भी अगर जाए तो अब मिलने का ग़म होगा