विभागीय आदेश के बाद शिक्षकों के बीच बढ़ी हलचल
गौवंश संरक्षण अभियान में शिक्षा विभाग की एंट्री
बरेली: अब तक आपने सरकारी स्कूलों के गुरुजी लोगों को बच्चों को क ख ग घ पढ़ाते, मिड-डे मील का चावल नापते और चुनाव में ड्यूटी बजाते देखा होगा। लेकिन अब बरेली के बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) दफ्तर से एक ऐसा ‘वजनी’ आदेश आया है, जिसे सुनकर टीचरों के दिमाग मे ‘भूसे’ की बत्ती जल गई है!
जी हां, जिला प्रशासन ने ठान लिया है कि जब तक बेसिक शिक्षा विभाग है, तब तक कोई भी काम नामुमकिन नहीं है। अब जिले के सरकारी मास्टर साहब लोग आवारा और बेसहारा गाय-बैलों (गौवंश) के भरण-पोषण के लिए 1500 कुंतल (यानी पूरे डेढ़ लाख किलो) भूसा दान में इकट्ठा करवाएंगे।

कलेक्ट्रेट की बैठक और गुरुजी का टारगेट
कहानी शुरू होती है 14 मई को कलेक्ट्रेट सभागार में हुई एक मीटिंग से, जिसकी अध्यक्षता खुद जिलाधिकारी महोदय कर रहे थे। वहां तय हुआ कि भाई, गायों के लिए भूसा चाहिए। तो सबसे मजबूत कंधे किसके हैं? बिल्कुल सही समझे—शिक्षा विभाग के!
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी के लेटर का हवाला देते हुए BSA साहिबा ने आदेश जारी कर दिया है कि बरेली के सभी 15 विकास खंडों (जैसे बिथरी चैनपुर, भोजीपुरा, फरीदपुर, मीरगंज, नवाबगंज आदि) से 100-100 कुंतल भूसा दान में जुटाया जाएगा।
बेसिक के ज़्यादातर शिक्षक जनगणना की ड्यूटी में लगे हुए हैं। ऐसे में वह भूसा कैसे इकठ्ठा कर पाएगा। टीचर से उसकी गरिमा अनुरूप काम कराया जाना चाहिए।
भानु प्रताप, जिलाध्यक्ष यूटा
“खंड शिक्षा अधिकारी महोदय ने अभी वाट्सअप ग्रुप पर आदेश फॉरवर्ड किया है। अभी शिक्षकों को आदेशित नहीं किया है। आगे देखते हैं क्या होता है”
प्रियंका शुक्ला, जिलाध्यक्ष – राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, बरेली
तो अब ‘बेसिक’ के टीचर क्या-क्या करेंगे?
इस आदेश के बाद अब कुछ इस तरह का नजारा देखने को मिल सकता है:
- ‘ए फॉर एप्पल’ नहीं, ‘बी फॉर भूसा’: मास्टर साहब अब घर-घर जा कर पूछ सकते हैं, “बच्चों, ये बताओ किसके घर में इस बार गेहूं की मढ़ाई हुई है और कौन गुरुजी को दो बोरी भूसा दान में दिलवा सकता है?”
- फील्ड ड्यूटी (भूसा खोजो अभियान): खंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) के नेतृत्व में टीचरों की ‘स्पेशल टास्क फोर्स’ गांवों में घूम-घूमकर किसानों के चक्कर काटेगी। गुरुजी अब कॉपियां चेक करने वाले पेन की जगह हाथ में बोरी लेकर दानदाताओं को तलाशेंगे।
- व्हाट्सएप ग्रुप पर ‘भूसा रिपोर्टिंग’: शाम को हाजिरी के साथ अब शायद यह भी रिपोर्ट देनी पड़े— “सर, आज प्राथमिक विद्यालय के स्टाफ ने मिलकर 2 कुंतल भूसा कलेक्ट कर लिया है, फोटो संलग्न है!”
- पशु चिकित्सा अधिकारियों से बिठाना होगा तालमेल: शिक्षकों को बकायदा ब्लॉक के खंड विकास अधिकारी (BDO) और पशु चिकित्सा अधिकारियों से तालमेल बिठाना होगा, उनके मोबाइल नंबर पर अपडेट देना होगा और अपनी ‘भूसा प्रगति’ की रिपोर्ट सीधे BSA दफ्तर भेजनी होगी।
गुरुजी’ बने ऑलराउंडर
शिक्षक समाज में अब यह चर्चा जोरों पर है कि आखिर एक अकेला मास्टर क्या-क्या संभाले? वैसे ही इस समय जनगणना (Census) का बेहद महत्वपूर्ण और भारी-भरकम कार्य गतिमान है, जिसमें शिक्षक दिन-रात एक करके डेटा जुटाने में लगे हैं। अब जनगणना की डिजिटल फीडिंग और कागजी दौड़-भाग के बीच ही यह 1500 कुंतल भूसा जुटाने का नया ‘टार्गेट’ भी सामने आ गया है।
शिक्षकों का कहना है कि साहब, चुनाव ड्यूटी हो, राशन का वेरिफिकेशन हो, डिजिटल अटेंडेंस हो, गतिमान जनगणना हो या अब गायों के लिए भूसा मांगना हो—प्रशासन को हमेशा ‘बेसिक’ के कंधे ही सबसे मजबूत नजर आते हैं।
अब देखना यह है कि बरेली के गुरुजी लोग जनगणना की इस व्यस्तता के बीच, पढ़ाई के ‘लंच ब्रेक’ में 1500 कुंतल भूसे का यह भारी-भरकम लक्ष्य कब तक पूरा कर पाते हैं! तब तक के लिए, जय जवान, जय किसान और जय ‘भूसा जुटाते’ गुरुमान!






