Special Report | फहीम क़रार | LimelightMedia.in | स्वास्थ्य डेस्क
बरेली। आज भी समाज में तपेदिक (टीबी) को लेकर कई तरह की भ्रांतियां फैली हुई हैं। बहुत से लोग इसे लाइलाज या जानलेवा बीमारी मानते हैं, जबकि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के अनुसार टीबी का समय पर और पूरा इलाज कराने पर मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है। भारत सरकार भी टीबी की मुफ्त जांच, दवाइयों और उपचार की व्यापक व्यवस्था उपलब्ध करा रही है।
इन्हीं महत्वपूर्ण पहलुओं पर LimelightMedia.in के लिए वरिष्ठ पत्रकार फहीम क़रार ने प्रसिद्ध श्वसन रोग विशेषज्ञ डॉ. दीपक माहेश्वरी (MBBS, MD – Respiratory Medicine) से विशेष बातचीत की। इस दौरान उन्होंने टीबी के लक्षण, संक्रमण, बचाव और उपचार से जुड़े कई अहम सवालों के जवाब दिए।

टीबी के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
डॉ. दीपक माहेश्वरी के अनुसार यदि किसी व्यक्ति में निम्न लक्षण लगातार दिखाई दें, तो तुरंत जांच करानी चाहिए—
- वजन का तेजी से कम होना।
- दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक लगातार खांसी।
- लगातार बुखार आना।
- भूख कम लगना।
- रात में अत्यधिक पसीना आना।
- गंभीर स्थिति में खांसी के साथ खून आना।
उन्होंने कहा कि ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज करना बीमारी को गंभीर बना सकता है।
टीबी कैसे फैलती है?
डॉ. माहेश्वरी ने बताया कि टीबी माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस (Acid-Fast Bacilli) नामक बैक्टीरिया से होने वाली संक्रामक बीमारी है। जब फेफड़ों का टीबी मरीज खांसता, छींकता या बोलता है, तो हवा में सूक्ष्म कण फैलते हैं। इन्हें सांस के जरिए दूसरा व्यक्ति ग्रहण कर सकता है। हालांकि हर संक्रमित व्यक्ति को टीबी नहीं होती। जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) मजबूत होती है, उनके शरीर में बैक्टीरिया निष्क्रिय (Dormant) अवस्था में रह सकता है।

क्या टीबी सिर्फ फेफड़ों में होती है?
नहीं। फेफड़ों के अलावा टीबी शरीर के अन्य अंगों जैसे आंत, हड्डियां, लिम्फ नोड्स, मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी को भी प्रभावित कर सकती है।
परिवार के लोग क्या सावधानी रखें?
डॉक्टर ने बताया कि संक्रमित पशुओं का बिना उबाला दूध या अधपका मांस खाने से बोवाइन ट्यूबरकुलोसिस का खतरा भी हो सकता है।
- यदि घर में किसी व्यक्ति को फेफड़ों की टीबी है तो
- मरीज उपचार शुरू होने तक मास्क का प्रयोग करे।
- परिवार के सदस्य भी आवश्यकतानुसार मास्क पहनें।
- कमरों में पर्याप्त हवा और धूप आने दें।
- मरीज की दवा एक भी दिन न छूटे।
सरकार द्वारा निर्धारित पूरा उपचार (आमतौर पर 6 माह या चिकित्सकीय सलाह अनुसार) अवश्य पूरा करें।
बीच में दवा छोड़ना क्यों खतरनाक है?
डॉ. दीपक माहेश्वरी ने बताया कि कई मरीज कुछ सप्ताह बाद राहत मिलने पर दवा बंद कर देते हैं। यही सबसे बड़ी गलती है।
इससे टीबी के जीवाणु दवाओं के प्रति प्रतिरोधी (Drug Resistant) हो जाते हैं और बीमारी एमडीआर (MDR-TB) या एक्सडीआर (XDR-TB) जैसी गंभीर अवस्था में पहुंच सकती है, जिसका इलाज लंबा और कठिन होता है।
यदि किसी मरीज का इलाज बीच में छूट गया हो तो उसे तुरंत चिकित्सक से संपर्क कर CBNAAT सहित आवश्यक जांच करानी चाहिए।
सरकारी अस्पतालों में मुफ्त जांच और इलाज
सरकार द्वारा टीबी की जांच और उपचार पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है।
इनमें प्रमुख सुविधाएं शामिल हैं—
- AFB जांच
- CBNAAT जांच
- मुफ्त दवाइयां
- विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श
- दवा प्रतिरोधी टीबी (Drug Resistant TB) का विशेष उपचार

डॉक्टर का संदेश
डॉ. दीपक माहेश्वरी का कहना है कि “टीबी से डरने की नहीं, समय पर जांच और पूरा इलाज कराने की जरूरत है। सही समय पर इलाज शुरू करने और पूरा कोर्स पूरा करने से अधिकांश मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो जाते हैं।”
टीबी अब लाइलाज नहीं रही
टीबी अब लाइलाज बीमारी नहीं है। जागरूकता, समय पर जांच, नियमित दवा और चिकित्सकीय सलाह का पालन करके इस बीमारी को पूरी तरह हराया जा सकता है। यदि लगातार खांसी, बुखार या वजन कम होने जैसे लक्षण दिखाई दें तो बिना देर किए नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र या विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क करें।
टीबी अब लाइलाज बीमारी नहीं है। जागरूकता, समय पर जांच, नियमित दवा और चिकित्सकीय सलाह का पालन करके इस बीमारी को पूरी तरह हराया जा सकता है। – डॉ दीपक माहेश्वरी, प्रेमलोक अस्पताल
रिपोर्ट: फहीम क़रार
वरिष्ठ संवाददाता | LimelightMedia.in

