साक्षरता अभियान की शुरुआत, बंदियों को बांटी गईं पुस्तक, कॉपी, स्लेट और स्टेशनरी की किट।
बरेली। जिला कारागार, बरेली में निरक्षर बंदियों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से साक्षरता अभियान की शुरुआत की गई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बरेली की सचिव श्रीमती जया प्रियदर्शिनी ने अभियान का शुभारंभ किया। वर्तमान में जिला कारागार में 27 निरक्षर बंदी हैं, जिनका पंजीकरण कर लिया गया है।
इन बंदियों को पढ़ाने के लिए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, बरेली के स्तर से एक शिक्षक की तैनाती भी कर दी गई है। अभियान के तहत सचिव जया प्रियदर्शिनी ने 27 निरक्षर बंदियों को पुस्तक, कॉपी, रबर, पेंसिल और स्लेट की एक-एक किट वितरित की। किट मिलने के बाद बंदियों में पढ़ाई को लेकर उत्साह दिखाई दिया।
रोज तीन से चार घंटे होगी पढ़ाई
जिला जेल अधीक्षक आलोक कुमार शुक्ला ने बताया कि तैनात शिक्षक द्वारा निरक्षर बंदियों को प्रतिदिन करीब तीन से चार घंटे पढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि बंदियों को समय का सदुपयोग करते हुए शिक्षा प्राप्त करनी चाहिए, ताकि वे जेल से बाहर निकलने के बाद समाज की मुख्यधारा से जुड़कर बेहतर जीवन की शुरुआत कर सकें।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव जया प्रियदर्शिनी ने बंदियों को पढ़ने-लिखने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि जेल में खाली समय व्यर्थ न गंवाएं और शिक्षा प्राप्त कर एक बेहतर इंसान बनने का प्रयास करें।
20 सितंबर को होगी साक्षरता परीक्षा
बताया गया कि भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत आगामी 20 सितंबर को देशभर में साक्षरता परीक्षा आयोजित की जाएगी। जिला जेल के पंजीकृत निरक्षर बंदी भी इस परीक्षा में प्रतिभाग करेंगे। इन 27 बंदियों में एक महिला बंदी भी शामिल है।
कक्षा पांच से डिग्री तक शिक्षा की तैयारी
भविष्य में जिला कारागार में बंदियों की शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए कक्षा-5, कक्षा-8, हाईस्कूल, इंटरमीडिएट और डिग्री स्तर की शिक्षा की व्यवस्था कराने की योजना है। इसके लिए बेसिक शिक्षा परिषद, एनआईओएस, इग्नू और उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के विशेष केंद्र स्थापित कराने का प्रयास किया जाएगा।
इसके साथ ही जिला कारागार में पुस्तकालय की स्थापना भी कराई जानी है, जिससे बंदियों को नियमित रूप से अध्ययन की सुविधा मिल सके।
कौशल विकास से आत्मनिर्भर बनाने की योजना
जेल अधीक्षक आलोक कुमार शुक्ला ने बताया कि बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए साक्षरता अभियान के साथ-साथ जल्द ही व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य बंदियों को रोजगारपरक कौशल प्रदान कर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है।
उन्होंने बताया कि जिला कारागार में साक्षरता कार्यक्रम शुरू कराने में बरेली निवासी सेवानिवृत्त जेल अधीक्षक मो. अकरम खां का विशेष सहयोग और मार्गदर्शन रहा।
कार्यक्रम का संचालन जेल अधीक्षक आलोक कुमार शुक्ला ने किया। इस अवसर पर डिप्टी जेलर राघवेंद्र सिंह वर्मा, वीरेश्वर प्रताप सिंह, सौमित्रदेव त्रिपाठी, देवदत्त, जिला समन्वयक साक्षरता आशीष, शिक्षाध्यापक संजीव गंगवार, चीफ हेड वार्डर रामगोपाल सिंह एवं महिला जेल वार्डर कु. रीना सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
