बरेली: सड़कों पर कांवड़ियों का सैलाब, उर्स में जायरीनों का हुजूम, फूलों से हुआ इस्तकबाल

बरेली में उर्स-ए-रजवी और कांवड़ यात्रा के दौरान गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल देखने को मिली। जायरीनों और कांवड़ियों के बीच आपसी सम्मान और सहयोग दिखाई दिया।

आला हजरत और भोले के जयघोष से गूंजा बरेली, कांवड़ियों और जायरीनों के बीच दिखा आपसी सम्मान; उर्स में पहली बार कांवड़ यात्रा को ध्यान में रखकर शाकाहारी भोजन की व्यवस्था

बरेली। नाथ नगरी बरेली में शनिवार को आस्था और भाईचारे की ऐसी तस्वीर देखने को मिली, जिसने शहर की गंगा-जमुनी तहजीब को एक बार फिर जीवंत कर दिया। एक ओर उर्स-ए-रजवी में शामिल होने आए लाखों अकीदतमंद आला हजरत की मोहब्बत में सदाएं बुलंद कर रहे थे, तो दूसरी ओर भगवा धारण किए कांवड़ियों के जत्थे हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष के साथ शहर के विभिन्न मार्गों से गुजर रहे थे। आस्था के रंग भले अलग थे, लेकिन एक-दूसरे की धार्मिक भावनाओं के प्रति सम्मान और सहयोग का भाव दोनों ओर दिखाई दिया।

उर्स आला हजरत के दौरान ऊपर से ली गई एक तस्वीर
उर्स के दौरान ड्रोन से भी बरेली प्रशासन ने की निगरानी।

कई स्थानों पर कांवड़ियों के जत्थों का पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया। वहीं, उर्स में शामिल जायरीनों ने कांवड़ियों के आवागमन के लिए सड़क का हिस्सा खाली कर रास्ता देने में सहयोग किया। पुलिस और प्रशासन की रूट मैनेजमेंट व्यवस्था के बीच दोनों धार्मिक आयोजनों से जुड़े लोगों ने संयम और समझदारी का परिचय दिया।

शनिवार को आला हजरत का कुल शरीफ संपन्न होने के साथ उर्स-ए-रजवी का समापन हुआ। इसी दौरान सावन और कांवड़ यात्रा के चलते जिले के विभिन्न मार्गों पर कांवड़ियों के जत्थों का आवागमन भी जारी रहा। लाखों लोगों की आवाजाही के बावजूद पुलिस-प्रशासन की संयुक्त रणनीति, रूट डायवर्जन, बैरिकेडिंग और लगातार मॉनिटरिंग के चलते दोनों बड़े धार्मिक आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए।

एसएसपी और डीएम बरेली ने मौके पर जाकर लिया जायजा।


इस बार उर्स-ए-रजवी के दौरान एक पहल विशेष रूप से चर्चा में रही। सावन और कांवड़ यात्रा को ध्यान में रखते हुए मुस्लिम समाज की ओर से उर्स के दौरान शाकाहारी भोजन परोसने की व्यवस्था की गई। इसके पीछे संदेश स्पष्ट था कि अपनी धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए दूसरे धर्म की आस्था और भावनाओं का भी सम्मान किया जाए।

शहर में शनिवार को इसका असर भी दिखाई दिया। जिन रास्तों से उर्स में शामिल जायरीन गुजर रहे थे, उन्हीं क्षेत्रों से कांवड़ियों के जत्थों का भी आवागमन हो रहा था। दोनों ओर धार्मिक उद्घोष सुनाई देते रहे, लेकिन कहीं टकराव के बजाय आपसी सहयोग और सम्मान का माहौल दिखाई दिया।

पुलिस-प्रशासन ने संभाली कमान

उर्स और कांवड़ यात्रा को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए वरिष्ठ अधिकारी लगातार फील्ड में सक्रिय रहे। एडीजी जोन रमित शर्मा, कमिश्नर शंभू कुमार, डीआईजी अजय कुमार साहनी, डीएम अविनाश सिंह, एसएसपी अनुराग आर्य, एसपी सिटी मानुष पारीख और एसपी साउथ आंशिक वर्मा समेत पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया।

उर्स के बाद जायरीन से शहर की सड़कें हुई जाम।


अधिकारियों ने चौकी चौराहा, पटेल चौक, बिहारीपुर, सिविल लाइंस समेत उर्स से जुड़े प्रमुख मार्गों और संवेदनशील स्थानों का निरीक्षण किया। भीड़ का दबाव बढ़ने पर मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों को तत्काल आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

सुरक्षा व्यवस्था में तकनीक का भी बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया गया। पुलिस लाइन स्थित इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर से वरिष्ठ अधिकारियों ने सीसीटीवी कैमरों की लाइव फीड के माध्यम से उर्स में आने वाले जायरीनों और कांवड़ियों के जत्थों की गतिविधियों पर नजर रखी।

जिन स्थानों पर भीड़ का दबाव अधिक दिखाई दिया, वहां कंट्रोल सेंटर से पब्लिक एड्रेस सिस्टम के जरिए तत्काल अनाउंसमेंट कराया गया। मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों को भीड़ नियंत्रित करने और यातायात सुचारू बनाए रखने के निर्देश दिए गए।

ट्रैफिक पुलिस ने संभाला रूट और बैरिकेडिंग

एसपी ट्रैफिक अकमल खान
के नेतृत्व में यातायात पुलिस ने प्रमुख मार्गों और चौराहों पर व्यवस्था संभाली। कांवड़ियों और जायरीनों की अधिक आवाजाही वाले मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। बैरिकेडिंग के जरिए पैदल श्रद्धालुओं और वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित किया गया।

प्रशासन की कोशिश रही कि धार्मिक आयोजनों में शामिल श्रद्धालुओं के साथ आम नागरिकों को भी कम से कम परेशानी हो। भीड़ बढ़ने की सूचना मिलते ही कंट्रोल रूम से संबंधित प्वाइंट पर तैनात पुलिसकर्मियों को अलर्ट किया जाता रहा।

डीएम-एसएसपी ने पैदल भ्रमण कर लिया जायजा

डीएम अविनाश सिंह और एसएसपी अनुराग आर्य ने पुलिस एवं प्रशासनिक टीम के साथ कई इलाकों में पैदल भ्रमण कर सुरक्षा और यातायात व्यवस्था का जायजा लिया। अधिकारियों ने ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को सतर्क रहने के साथ श्रद्धालुओं के साथ संयम और संवेदनशीलता से व्यवहार करने के निर्देश दिए।

चप्पे-चप्पे पर पुलिसकर्मियों की तैनाती और वरिष्ठ अधिकारियों की लगातार मॉनिटरिंग के बीच बरेली ने एक बार फिर धार्मिक सह-अस्तित्व और भाईचारे का संदेश दिया।

इस बार समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस की ओर से भी दरगाह पर चादर चढ़ाई गई।