बरेली: डॉ. उज्मा कमर को लखनऊ में मिला ‘राधाकृष्णन डिस्टिंक्शन’ और ‘सर्टिफाइड हाईपाथ लीडर’ सम्मान

एडुविजन इंडिया की निदेशक डॉ. उज्मा कमर को लखनऊ के सिटी मॉन्टेसरी स्कूल में आयोजित लीडरशिप सम्मेलन के दौरान राधाकृष्णन डिस्टिंक्शन और सर्टिफाइड हाईपाथ लीडर सम्मान से सम्मानित किया गया।

डॉ. उज्मा कमर को लखनऊ में मिला ‘राधाकृष्णन डिस्टिंक्शन’ और ‘सर्टिफाइड हाईपाथ लीडर’ सम्मान

शिक्षक दिवस की पूर्व बेला पर डॉउज्मा कमर अवॉर्ड लेते हुए।

सीएमएस लखनऊ में आयोजित तीन दिवसीय लीडरशिप सम्मेलन में मिली राष्ट्रीय स्तर की उपलब्धि, डॉ. भारती गांधी और डॉ. सुनीता गांधी ने एडुविजन इंडिया की पहल को सराहा

बरेली/लखनऊ। शिक्षक दिवस से पूर्व शिक्षा जगत से जुड़ी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। एडुविजन इंडिया की निदेशक डॉ. उज्मा कमर को राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित ‘राधाकृष्णन डिस्टिंक्शन अवार्ड’ तथा ‘सर्टिफाइड हाईपाथ लीडर अवार्ड’ से सम्मानित किया गया है।

लखनऊ स्थित विश्व प्रसिद्ध (सीएमएस) में आयोजित ग्लोबल एजुकेशन एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट के तीन दिवसीय लीडरशिप सम्मेलन के दौरान डॉ. उज्मा कमर को यह सम्मान प्रदान किया गया। सम्मेलन में उन्होंने सक्रिय सहभागिता करते हुए सीएमएस की विभिन्न शाखाओं का भ्रमण किया और वहां संचालित शैक्षणिक गतिविधियों एवं नवाचारों का अवलोकन किया।

लखनऊ में लीडरशिप कार्यक्रम में डॉ उज्मा क़मर।

एडुविजन इंडिया की ‘एजुकेशन पोस्ट’ पहल की सराहना

कार्यक्रम के दौरान एडुविजन इंडिया की विशेष पहल ‘एजुकेशन पोस्ट’ को सीएमएस की संस्थापिका डॉ. भारती गांधी तथा ग्लोबल एजुकेशन एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की संस्थापिका डॉ. सुनीता गांधी ने देखा। दोनों शिक्षाविदों ने शिक्षा के क्षेत्र में जागरूकता बढ़ाने के लिए किए जा रहे इस प्रयास की सराहना की।

शिक्षक दिवस केवल उत्सव नहीं, आत्ममंथन का अवसर : डॉ. उज्मा कमर

सम्मेलन के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों से सामने आईं स्कूलों से जुड़ी दुखद घटनाओं पर भी गंभीर चर्चा हुई। छात्र-शिक्षक संबंधों में बढ़ती संवेदनहीनता, स्कूलों में हिंसा और बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य जैसे विषयों पर उपस्थित शिक्षाविदों ने चिंता व्यक्त की।

शिक्षक दिवस के अवसर पर डॉ. उज्मा कमर ने शिक्षकों से आत्ममंथन की अपील करते हुए कहा कि शिक्षक दिवस केवल उत्सव मनाने का दिन नहीं, बल्कि स्वयं का आत्मपरीक्षण करने का अवसर भी है।

उन्होंने कहा कि यदि किसी शिक्षक को पढ़ाते समय लगातार अत्यधिक गुस्सा आता है अथवा अनुशासन के नाम पर शारीरिक और मानसिक हिंसा का सहारा लेना पड़ता है, तो उसे स्वयं से यह प्रश्न पूछना चाहिए कि क्या उसमें वास्तव में शिक्षक बनने के लिए आवश्यक संवेदनशीलता और सकारात्मक दृष्टिकोण है।

डॉ. उज्मा कमर ने कहा कि शिक्षण भय पर नहीं, बल्कि धैर्य, सहानुभूति और संवाद पर आधारित होना चाहिए। यदि कक्षाओं में संवेदनशीलता समाप्त हो जाएगी तो स्वस्थ और मानवीय समाज की कल्पना भी कठिन हो जाएगी।

बाल-अनुकूल और भयमुक्त विद्यालयों पर जोर

डॉ. उज्मा कमर ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति की भावना के अनुरूप विद्यालयों में भयमुक्त, सुरक्षित और बाल-अनुकूल वातावरण तैयार करना अत्यंत आवश्यक है। शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित न रहें, बल्कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक आवश्यकताओं और सर्वांगीण विकास पर भी विशेष ध्यान दें।

उन्होंने बताया कि एडुविजन इंडिया के माध्यम से शिक्षकों के लिए नियमित एटिट्यूड टेस्ट, संवेदनशीलता विकास और मेंटल हेल्थ ट्रेनिंग जैसे विषयों पर जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

बरेली के लिए प्रेरणादायक उपलब्धि

क्लासरूम स्तर से लेकर राष्ट्रीय शैक्षणिक मंचों तक सक्रिय भागीदारी और शिक्षण में नवाचारों को प्रोत्साहित करने की दिशा में डॉ. उज्मा कमर की यह उपलब्धि बरेली और उत्तर प्रदेश के शिक्षा जगत के लिए प्रेरणादायक मानी जा रही है।

इस राष्ट्रीय सम्मान पर बरेली के विभिन्न शैक्षिक संगठनों, शिक्षकों और गणमान्य नागरिकों ने डॉ. उज्मा कमर को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।