आम आदमी के मर्म को छूती हैं गौरा पंत शिवानी की कहानियां

बरेली में गौरा पंत शिवानी की जयंती पर साहित्यिक गोष्ठी आयोजित हुई। साहित्यकारों ने उनकी कहानियों, उपन्यासों और हिंदी साहित्य में योगदान को याद किया।

बरेली में साहित्यकार शिवानी की जयंती पर गोष्ठी आयोजित, साहित्यकारों ने रचनाओं के माध्यम से किया उनके साहित्यिक योगदान का स्मरण

बरेली। अखिल भारतीय साहित्य परिषद के तत्वावधान में वरिष्ठ कथाकार एवं उपन्यासकार गौरा पंत ‘शिवानी’ की जयंती पर राजेंद्र नगर में साहित्यिक गोष्ठी का आयोजन किया गया।

निरुपमा अग्रवाल की अध्यक्षता में आयोजित गोष्ठी में साहित्यकारों ने शिवानी के साहित्यिक योगदान को याद करते हुए कहा कि उनकी कहानियां आम आदमी के मर्म को छूती हैं और मानवीय संवेदनाओं को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

साहित्यकार निरुपमा अग्रवाल, डॉ सुरेश बाबू, वरिष्ठ पत्रकार निर्भय सक्सेना।

परिषद के प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. सुरेश बाबू मिश्रा ने कहा कि गौरा पंत ‘शिवानी’ मर्मस्पर्शी कहानियों की कालजयी कथाशिल्पी थीं। उनकी रचनाओं में मानवीय भावनाओं, सामाजिक परिस्थितियों और जीवन के विविध पक्षों का सजीव चित्रण मिलता है।

उन्होंने अपनी साहित्यिक यात्रा के दौरान अनेक उपन्यास, कहानी संग्रह और संस्मरण लिखकर हिंदी साहित्य को समृद्ध किया। उनकी कृतियां हिंदी साहित्य की अनमोल धरोहर हैं। उनके उपन्यास ‘कृष्णकली’ के लिए उन्हें पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया था।

जनपदीय अध्यक्ष डॉ. ब्रजेश कुमार शर्मा ने कहा कि शिवानी के दो उपन्यासों का धर्मयुग पत्रिका में धारावाहिक प्रकाशन हुआ, जिससे उनकी लोकप्रियता घर-घर तक पहुंची।

अध्यक्षीय उद्बोधन में कहानीकार निरुपमा अग्रवाल ने कहा कि शिवानी की कहानियों और उपन्यासों में तत्कालीन समाज का प्रतिबिंब स्पष्ट दिखाई देता है। उनकी रचनाएं अपने समय के सामाजिक परिवेश और मानवीय संवेदनाओं को समझने का अवसर प्रदान करती हैं। उन्होंने शिवानी के कई उपन्यासों के प्रसंग भी साझा किए।

गोष्ठी में विमलेश चंद्र दीक्षित, शिव ओम शर्मा, डॉ. विनीता सिंह, गंगाराम पाल और रमेश रंजन ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। संजीव कुमार शर्मा ‘गंभीर’ एवं निर्भय सक्सेना भी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. ब्रजेश कुमार शर्मा द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। संचालन प्रोफेसर विनीता सिंह ने किया, जबकि विमलेश चंद्र दीक्षित ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।