जयपुर में सम्पन्न हुआ अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ का 9वां राष्ट्रीय अधिवेशन

“देश के हित में शिक्षा, शिक्षा के हित में शिक्षक और शिक्षक के हित में समाज” की भावना के साथ शिक्षकों का राष्ट्रीय मंथन

जयपुर (राजस्थान), 7 अक्टूबर 2025
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ का 9वां त्रिदिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन 5 से 7 अक्टूबर तक जयपुर के जामडोली में संपन्न हुआ।
शिक्षक राष्ट्र के लिए” की अवधारणा पर आधारित इस अधिवेशन में शिक्षा, समाज और राष्ट्र के भविष्य पर व्यापक चिंतन हुआ।

अधिवेशन में शामिल हुए बरेली के पदाधिकारी।

अधिवेशन का शुभारंभ राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने संजीवनी रायकर प्रदर्शनी का दीप प्रज्वलन कर किया।
इस अवसर पर जयपुर की सांसद मंजू शर्मा और संघ के क्षेत्र प्रचारक श्री निम्बाराम जी भी मौजूद रहे।

उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा,
विशिष्ट अतिथि के रूप में उपमुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेम चंद्र बैरवा,
तथा मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय बौद्धिक शिक्षण प्रमुख श्री सुनील भाई मेहता उपस्थित रहे।

🏅 शिक्षा भूषण सम्मान समारोह

दूसरे दिन के सत्र में शिक्षा भूषण सम्मान प्रदान किए गए।
प्रो. भगवती प्रकाश शर्मा, प्रो. सुषमा यादव, और श्री वी.जे. श्रीकुमार को उनके विशिष्ट शैक्षिक योगदान के लिए
पूजनीय महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी जी महाराज द्वारा सम्मानित किया गया।

बरेली जिलाध्यक्ष प्रियंका शुक्ला अपनी टीम के साथ।

📜 शिक्षक हितों से जुड़े प्रस्ताव पारित

अधिवेशन के तीसरे दिन शिक्षक समस्याओं को लेकर प्रस्ताव संख्या 03 पारित किया गया, जिसमें 22 प्रमुख बिंदु शामिल हैं।
प्रमुख प्रस्तावों में निम्नलिखित बातें प्रमुख रहीं —

टीईटी अनिवार्यता पर पुनर्विचार:
सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों की सेवा सुरक्षा और पदोन्नति सुनिश्चित करने की मांग।

पुरानी पेंशन योजना (OPS):
1 जनवरी 2004 से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षकों के लिए OPS लागू करने का प्रस्ताव।

सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष:
संपूर्ण देश में शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु समान रूप से 65 वर्ष करने की सिफारिश।

एमडीएम से मुक्ति:
शिक्षकों को केवल शिक्षण कार्य तक सीमित रखने और मिड-डे मील जैसी प्रशासनिक जिम्मेदारियों से मुक्त करने की मांग।

शिक्षक-छात्र अनुपात:
प्रत्येक विद्यालय में उचित शिक्षक-छात्र अनुपात और हर कक्षा के लिए कम से कम एक शिक्षक की अनिवार्यता।

स्वास्थ्य सुविधाएँ:
सभी शिक्षकों को निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएँ और उनके प्रभावी क्रियान्वयन की गारंटी।

🕊️ समापन सत्र में डॉ. सुधांशु त्रिवेदी का ओजस्वी उद्बोधन

समापन सत्र में राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने “सुरक्षा सीमा से समाज तक” विषय पर प्रभावशाली उद्बोधन दिया।
उन्होंने कहा कि “शिक्षक केवल विद्यालय का स्तंभ नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा हैं।”

🌏 देशभर से शिक्षकों की उपस्थिति

इस अधिवेशन में 28 राज्यों से आए प्रांतीय, मंडलीय एवं जनपदीय पदाधिकारी शामिल हुए।
कार्यक्रम ने पूरे भारत की एकता, समरसता और शैक्षिक चेतना का सुंदर प्रतीक प्रस्तुत किया।

जनपद बरेली से विशेष रूप से उपस्थित रहे —
प्रदेश संयुक्त मंत्री एवं जिलाध्यक्ष प्रियंका शुक्ला,
जिला महामंत्री सुनील कुमार शर्मा,
जिला संगठन मंत्री सत्यार्थ पाराशरी,
जिला कोषाध्यक्ष परीक्षित गंगवार,
जिला संयुक्त महामंत्री ऊषा देवी,
तथा उपाध्यक्ष वंदना पांडेय


✍️ महासंघ का संकल्प