भौतिक सत्यापन अनिवार्य, आपत्तियों के बाद ही होगा अंतिम निर्णय; मनमाने तबादलों पर रोक
शिक्षकों के तबादले पर हाईकोर्ट सख्त, पोर्टल डेटा को अंतिम आधार मानने से इंकार
स्थानांतरण न हो दंडात्मक या भेदभावपूर्ण, छात्रहित सर्वोपरि रखने के निर्देश
प्रयागराज। ने प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में शिक्षकों के स्थानांतरण को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि शिक्षकों का तबादला किसी भी स्थिति में दंडात्मक या भेदभावपूर्ण नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों के हितों की रक्षा और शिक्षण व्यवस्था को मजबूत करना होना चाहिए।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रांसफर प्रक्रिया में उपयोग किए जा रहे ऑनलाइन पोर्टल के डेटा को अंतिम आधार नहीं माना जा सकता। इसे केवल एक संकेत के रूप में लिया जाए, जबकि वास्तविक स्थिति का भौतिक सत्यापन आवश्यक होगा।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए कि हर विद्यालय में कम से कम दो शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। जिन स्कूलों में पहले से दो शिक्षक कार्यरत हैं, वहां फिलहाल कोई बदलाव न किया जाए। अतिरिक्त शिक्षकों का समायोजन संतुलित तरीके से किया जाए, ताकि किसी भी स्कूल में पढ़ाई प्रभावित न हो।
महिला शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने कहा कि उनके स्थानांतरण में विशेष सावधानी बरती जाए। उन्हें यथासंभव उसी ब्लॉक या नजदीकी क्षेत्र में तैनाती दी जाए, ताकि उन्हें अनावश्यक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि 30 अप्रैल 2026 तक छात्र संख्या और शिक्षकों की स्थिति का भौतिक सत्यापन कराया जाए। इसके बाद 13 मई तक प्रभावित शिक्षक अपनी आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे। मामले की अगली सुनवाई 22 मई को निर्धारित की गई है।
इस आदेश से प्रदेश भर के शिक्षकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है और ट्रांसफर प्रक्रिया में पारदर्शिता व निष्पक्षता बढ़ेगी।





