वेतन बहाल करा कर ही उठे शिक्षक, बीएसए ऑफिस का किया देर रात तक घेराव

छात्र उपस्थिति को लेकर शिक्षकों का वेतन अवरुद्ध — भड़के शिक्षक, बीएसए ने किया वेतन बहाल

बरेली, 30 अक्टूबर — जनपद बरेली में आज शिक्षकों का आक्रोश देर रात तक उफान पर रहा। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा 29 अक्टूबर 2025 को जारी आदेश में ऑनलाइन छात्र उपस्थिति में शत-प्रतिशत अनुपालन न होने पर अनेक विद्यालयों के समस्त स्टाफ का वेतन रोकने के निर्देश जारी किए गए। इस निर्णय के विरोध में प्राथमिक शिक्षक संघ और राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के संयुक्त नेतृत्व में आज जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर धरना व विरोध प्रदर्शन किया गया।

📍 स्थान: जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय, बरेली 📍 समय: शाम 4 बजे से देर रात तक

🔹 विरोध और वार्ता विफल

प्रदर्शन का नेतृत्व जिला अध्यक्ष नरेश गंगवार (प्राथमिक शिक्षक संघ) और जिला महामंत्री सुनील कुमार शर्मा (राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ) ने संयुक्त रूप से किया। BSA से वार्ता के लिए पहुंचे वरिष्ठ खंड शिक्षा अधिकारी दिनेश चंद्र जोशी भी शिक्षकों की समस्याओं का समाधान नहीं कर सके। वार्ता विफल होने के बाद सैकड़ों शिक्षक कार्यालय परिसर में जमीन पर बैठ गए और “वेतन दो — घर जाएंगे” के नारे लगाने लगे।

BSA से वार्ता करते हुए संघ के पदाधिकारी

🔹 प्रमुख वक्तव्य:

  • नरेश गंगवार (जिलाध्यक्ष, प्राथमिक शिक्षक संघ)“हम अपने वेतन के लिए आए हैं, वेतन दे दीजिए, हम घर चले जाएंगे।”
  • सुनील कुमार शर्मा (महामंत्री, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ)“विभाग ने शिक्षकों को अनेक ऐप्स में उलझाकर शिक्षण का मूल उद्देश्य ही भुला दिया है। वेतन रोकना शिक्षकों के आत्मसम्मान पर प्रहार है।”
  • सत्यार्थ पाराशरी (संगठन मंत्री, महासंघ)“हम शैक्षिक नवाचारों का समर्थन करते हैं, परंतु व्यावहारिक कठिनाइयों को नज़रअंदाज़ कर वेतन रोकना अन्यायपूर्ण है।”
  • के.सी. पटेल (मंडलीय मंत्री)“शिक्षक समाज से संवादहीन रवैया ही आज की स्थिति का कारण है। अधिकारी संवाद से परहेज़ कर रहे हैं।”
  • भानु प्रताप सिंह (जिलाध्यक्ष, युटा)“विद्यालयों को प्रयोगशाला बना दिया गया है, शिक्षक गैर-शिक्षण कार्यों में उलझे हैं।”
  • परीक्षित गंगवार (कोषाध्यक्ष, महासंघ)“प्रांतीय नेतृत्व ने महानिदेशक महोदय को पत्र भेजकर कहा था कि विशेषज्ञ समिति का निर्णय आने तक उपस्थिति यथावत रखी जाए, फिर भी बरेली में आदेश जारी होना निंदनीय है।”
  • पारुल चंद्रा (उपाध्यक्ष, महासंघ)“वेतन हमारी गरिमा और सुरक्षा है। इसे रोकना मानसिक प्रताड़ना के समान है।”
  • राखी सक्सेना (महामंत्री, महिला शिक्षक संघ)“इस सत्र में पढ़ाई से अधिक समय ऑनलाइन कार्यों में चला गया, अब वेतन रोकना अन्याय है।”
  • सी.एल. चौधरी (शिक्षक नेता)“लगातार धमकियों से शिक्षकों में मानसिक तनाव बढ़ा है, कई साथी अस्वस्थ हो चुके हैं।”
  • शिखा अग्रवाल (जिला मंत्री, महासंघ)“वेतन हमारा अधिकार है, किसी भी अधिकारी को इसे रोकने का अधिकार नहीं।”

🔹 संगठन की संयुक्त मांगें:

  1. विशेषज्ञ समिति के निर्णय आने तक उपस्थिति व्यवस्था यथावत रखी जाए।
  2. वेतन रोकने से संबंधित आदेश तत्काल वापस लिए जाएं।
  3. शिक्षकों के साथ सम्मानजनक संवाद स्थापित कर व्यावहारिक समाधान निकाला जाए।

🔹 उपस्थित पदाधिकारी:

शरद दीक्षित, आलमपुर जाफराबाद ब्लॉक अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद तिवारी, भूटा से अवनीश गंगवार, मझगांव से सत्यपाल सिंह, शेरगढ़ से दीपक कुमार, भोजीपुरा से राजपाल गंगवार, साथ ही हरविंद्र सिंह, शालिनी, अंजू, योगेश गंगवार, प्रेमपाल गंगवार, हरीश गंगवार, सूरज गंगवार, रूपेंद्र राठौर, विजेंद्र सिंह, सिंकुल गंगवार, मुकेश गंगवार, देशबंधु गंगवार, डॉ यूनुस हुसैन, बलबीर सिंह, हेमंत मौर्य, पारुल चंद्रा, राजीव शर्मा, ऋषिपाल सिंह, पुष्पराज सिंह, मनोज गंगवार, सतीश शर्मा, अरविंद गुर्जर, वीरेंद्र (वीरू), राज पल्याल, प्रियंका भास्कर, सुधा देवी, तरणजीत, अन्नपूर्णा, विजेंद्र गुर्जर, करिश्मा अग्निहोत्री समेत सैकड़ों शिक्षक धरने में सम्मिलित रहे।

वार्ता के दौरान जिलाध्यक्ष नरेश गंगवार, केसी पटेल आदि।

🔹 निष्कर्ष:

संयुक्त शिक्षक संगठनों ने स्पष्ट किया कि जब तक वेतन बहाल नहीं किया जाता और आदेश वापस नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। देर रात BSA संजय सिंह ने वेतन बहाली का आदेश जारी कर दिया।