मिस वर्ल्ड 2025: थाईलैंड की ओपल सुचाता चुआंग्सरी बनीं 72वीं मिस वर्ल्ड

miss world 2025

 मिस इथियोपिया फर्स्ट रनर-अप, मिस पोलैंड तीसरे स्थान और मिस मार्टीनिक चौथे स्थान पर रहीं

हैदराबाद – 72वीं मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता का बहुप्रतीक्षित ग्रैंड फिनाले शनिवार को हैदराबाद में आयोजित हुआ, जहां थाईलैंड की ओपल सुचाता चुआंग्सरी (Opal Suchata Chuangsri) ने मिस वर्ल्ड 2025 का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया। ओपल ने दुनिया भर के लगभग 110 देशों की प्रतिभागियों को पीछे छोड़ते हुए यह ताज अपने नाम किया।

इथियोपिया की हासेट डेरेजे एडमसु इस प्रतियोगिता की उपविजेता रहीं। आयोजकों के मुताबिक, तेलंगाना में आयोजित एक महीने की सांस्कृतिक, उद्देश्यपूर्ण और सामाजिक गतिविधियों के बाद यह भव्य आयोजन अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंचा, जिसमें कुल 108 कंटेस्टेंट्स ने हिस्सा लिया।

ओपल की प्रोफ़ाइल पर एक नज़र

थाईलैंड की रहने वाली ओपल सुचाता चुआंग्सरी अंतरराष्ट्रीय संबंधों की छात्रा हैं। उन्हें मनोविज्ञान और मानव विज्ञान में गहरी रुचि है और वे भविष्य में एक वैश्विक राजदूत बनना चाहती हैं। ओपल स्तन कैंसर के लिए काम कर रहे संगठनों के साथ बतौर स्वयंसेवक जुड़ी हुई हैं। मिस वर्ल्ड की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, उन्हें संगीत में खास रुचि है और वे उकेलेले (Ukulele) बजाने में पारंगत हैं। उनके पास 16 बिल्लियां और 5 कुत्ते भी हैं – जो उनकी पशु-प्रेम भावना को दर्शाते हैं।

मानवता के लिए योगदान पर सम्मान

इस बार मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में अभिनेता सोनू सूद को ‘मिस वर्ल्ड ह्यूमैनिटेरियन अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया, जो उनके समाजसेवी कार्यों का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकारा जाना है।

भारत की नंदिनी गुप्ता टॉप-8 में नहीं पहुंच पाईं

भारत की ओर से इस प्रतियोगिता में प्रतिनिधित्व कर रहीं नंदिनी गुप्ता फाइनल के टॉप-8 में जगह नहीं बना सकीं। यदि वह यह खिताब जीत लेतीं, तो वह भारत की सातवीं मिस वर्ल्ड होतीं। भारत ने अब तक छह बार यह खिताब जीता है — पहली बार 1966 में रीता फारिया ने, और हाल ही में 2017 में मानुषी छिल्लर के नाम यह उपलब्धि दर्ज हुई थी। अन्य विजेताओं में ऐश्वर्या राय (1994), डायना हेडन (1997), युक्ता मुखी (1999) और प्रियंका चोपड़ा (2000) शामिल हैं।

72वीं मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता के विजेता की घोषणा मिस वर्ल्ड ऑर्गनाइज़ेशन की चेयरपर्सन जूलिया मोर्ले C.B.E. ने की। कार्यक्रम ने न सिर्फ सौंदर्य, बल्कि उद्देश्यपूर्ण कार्यों, सांस्कृतिक जुड़ाव और मानवीय मूल्यों को भी केंद्र में रखा।

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