आईवीआरआई दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति मुर्मु का संबोधन: पशु चिकित्सा में तकनीकी नवाचार और बेटियों की भागीदारी की सराहना
बरेली, 30 जून — उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) के दीक्षांत समारोह में रविवार को देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। अपने संबोधन में उन्होंने वैज्ञानिकों, शोधार्थियों और विशेष रूप से छात्राओं के योगदान की सराहना की तथा पशु चिकित्सा के क्षेत्र में तकनीकी नवाचार और संवेदनशीलता की आवश्यकता पर बल दिया।
राष्ट्रपति ने संस्थान की 135 वर्षों की यात्रा और उपलब्धियों को उल्लेखनीय बताया। उन्होंने कहा, “IVRI ने राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम में अहम भूमिका निभाई है और कई प्रभावी टीके विकसित किए हैं। ‘प्रिवेंशन इज बेटर देन केयर’ की कहावत पशु स्वास्थ्य के संदर्भ में और भी प्रासंगिक हो जाती है।”
उन्होंने पशुओं के प्रति अपने आत्मीय जुड़ाव को साझा करते हुए कहा कि वह जिस परिवेश से आती हैं, वहां पशु जीवन का अभिन्न हिस्सा रहे हैं। उन्होंने गिद्धों के तेजी से विलुप्त होने पर चिंता जताई और रासायनिक दवाओं पर प्रतिबंध को संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया।
समारोह में राष्ट्रपति ने मेडल प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को बधाई दी और विशेष रूप से छात्राओं की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा, “पशु चिकित्सा के क्षेत्र में बेटियों की भागीदारी गर्व की बात है। गांवों में भी महिलाएं ही पशुओं की देखभाल का मुख्य दायित्व निभाती हैं।”
उन्होंने छात्रों से अपील की कि शिक्षा पूर्ण करने के बाद वे केवल नौकरी के पीछे न भागें, बल्कि उद्यमिता की राह चुनें ताकि पशुपालन के क्षेत्र में रोजगार के अधिक अवसर पैदा हो सकें। जूनोटिक बीमारियों के संदर्भ में उन्होंने IVRI की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि कोरोना महामारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उपभोग आधारित संस्कृति के दुष्परिणामों पर विचार करना होगा।
राष्ट्रपति ने गांवों में पशु आरोग्य मेले आयोजित करने की जरूरत पर बल दिया और पर्यावरणीय असंतुलन जैसे मुद्दों — जैसे केंचुओं की घटती संख्या और भूमि की उर्वरता में कमी — की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने तकनीकी अनुसंधान के ज़रिए पशु रोगों के सस्ते और सुरक्षित निदान विकसित करने का सुझाव दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने भी छात्रों को संबोधित किया। उन्होंने गोल्ड मेडल पाने वाले छात्रों को बधाई दी और उन छात्रों का भी हौसला बढ़ाया जिन्हें पुरस्कार नहीं मिला। राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश की कृषि और पशुपालन से जुड़ी पांच यूनिवर्सिटियों में नई शिक्षा नीति को लागू करने और गुणवत्तापूर्ण शोध को बढ़ावा देने की दिशा में लगातार काम हो रहा है।
उन्होंने विश्वविद्यालयों से समाज के साथ गहरे जुड़ाव की अपेक्षा जताई और कहा कि शिक्षा की उपलब्धियां तभी सार्थक हैं जब वे समाज के हित में उपयोगी सिद्ध हों।






