चुन्ना मियां मंदिर: जब एक मुस्लिम उद्योगपति ने जमीन दान कर रची कौमी एकता की मिसाल

बरेली का लक्ष्मी नारायण मंदिर, जिसे चुन्ना मियां मंदिर कहा जाता है, सांप्रदायिक सौहार्द की अनूठी मिसाल है। जानिए कैसे चुन्ना मियां ने जमीन दान कर और कार सेवा कर मंदिर निर्माण में योगदान दिया।

बरेली। नाथ नगरी बरेली की पहचान केवल धार्मिक नगरी के रूप में ही नहीं, बल्कि गंगा-जमुनी तहजीब और सांप्रदायिक सौहार्द के प्रतीक शहर के रूप में भी है।

इसी भाईचारे की सबसे बड़ी मिसाल कटरा मान राय स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर, यानी चुन्ना मियां मंदिर है। इस मंदिर का निर्माण मुस्लिम उद्योगपति और समाजसेवी फ़ज़ल-उर-रहमान उर्फ चुन्ना मियां की प्रेरणा, भूमि दान और आर्थिक सहयोग से हुआ था। इतना ही नहीं, उन्होंने मंदिर निर्माण में स्वयं कार सेवा भी की थी।

मंदिर प्रांगण में वरिष्ठ पत्रकार निर्भय सक्सेना।

गली नवाबान निवासी शेर बीड़ी व्यवसायी फ़ज़ल-उर-रहमान उर्फ चुन्ना मियां ने मंदिर निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध कराई और आर्थिक सहयोग दिया। स्थानीय लोगों के अनुसार, निर्माण कार्य के दौरान उन्होंने मजदूरों के साथ स्वयं श्रमदान भी किया था। उनकी कार सेवा का ऐतिहासिक चित्र आज भी मंदिर परिसर में सुरक्षित है।

कटरा मान राय स्थित इस लाल रंग के भव्य मंदिर का उद्घाटन 16 मई 1960 को भारत के प्रथम राष्ट्रपति Rajendra Prasad ने किया था। यह आयोजन उस दौर में धार्मिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक माना गया।

वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक निर्भय सक्सेना बताते हैं कि उद्घाटन समारोह के समय वे बहुत छोटे थे। उनके पिता स्वर्गीय सुरेश चंद्र सक्सेना उन्हें गोद में लेकर कार्यक्रम में शामिल होने गए थे। यह दृश्य आज भी उनकी स्मृतियों में जीवंत है।

मंदिर में विभिन्न देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित हैं। यहां वर्षभर धार्मिक आयोजन, कथाएं और पर्व-त्योहार मनाए जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि चुन्ना मियां स्वयं भी मंदिर में आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होते थे और कथा-श्रवण करते थे।

निर्भय सक्सेना, वरिष्ठ पत्रकार

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