कलम का सफर: 51 वर्षों से पत्रकारिता को समर्पित निर्भय सक्सेना

पांच दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता, लेखन और समाजसेवा के क्षेत्र में सक्रिय निर्भय सक्सेना आज भी अपनी लेखनी से समाज को दिशा दे रहे हैं।

बरेली। बरेली की पत्रकारिता का इतिहास जब भी लिखा जाएगा, उसमें एक नाम विशेष सम्मान के साथ दर्ज होगा—निर्भय सक्सेना। सात दशक की उम्र पार कर चुके निर्भय सक्सेना पिछले 51 वर्षों से लगातार पत्रकारिता, लेखन और समाजसेवा के क्षेत्र में सक्रिय हैं। बदलते दौर, बदलती तकनीक और बदलती मीडिया संस्कृति के बीच उन्होंने अपनी लेखनी की विश्वसनीयता और सामाजिक सरोकारों को हमेशा प्राथमिकता दी।

पत्रकारिता को अक्सर लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है, लेकिन कुछ लोग इसे केवल पेशा नहीं बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी मानते हैं। निर्भय सक्सेना उन्हीं लोगों में शामिल हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत उस दौर में की जब पत्रकारिता में संसाधन सीमित थे, लेकिन खबरों की विश्वसनीयता सर्वोपरि मानी जाती थी।

जंतर मंतर के पत्रकार आंदोलन में शामिल निर्भय सक्सेना

वर्ष 1974 से शुरू हुआ उनका सफर आज भी उसी ऊर्जा और प्रतिबद्धता के साथ जारी है। पांच दशकों से अधिक समय में उन्होंने हजारों खबरें, फीचर और सामाजिक सरोकारों से जुड़े लेख लिखे, जिन्होंने पाठकों और समाज दोनों को प्रभावित किया।

निर्भय सक्सेना ने बरेली की सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों को बेहद करीब से देखा और उन्हें शब्दों में दर्ज किया। शहर के विकास, साहित्यिक आयोजनों, सामाजिक आंदोलनों और जनहित के मुद्दों पर उनकी पैनी नजर हमेशा बनी रही। उनकी रिपोर्टिंग का दायरा केवल घटनाओं तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने उन लोगों और विषयों को भी सामने लाने का काम किया जो अक्सर मुख्यधारा की खबरों से दूर रह जाते हैं। यही कारण है कि उनकी पहचान एक संवेदनशील और जनपक्षधर पत्रकार के रूप में बनी।

पत्रकारिता के साथ-साथ निर्भय सक्सेना का साहित्य और लेखन से भी गहरा जुड़ाव रहा है। उन्होंने अनेक विशेषांक, स्मारिकाओं और प्रकाशनों के संपादन व लेखन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी भाषा सरल, प्रभावी और पाठकों से सीधा संवाद स्थापित करने वाली रही है। उनकी लेखनी में तथ्यों की मजबूती के साथ मानवीय संवेदनाओं का भी समावेश दिखाई देता है। यही विशेषता उन्हें अपने समकालीन पत्रकारों से अलग पहचान दिलाती है।

पत्रकारिता दिवस पर मानव सेवा क्लब ने किया सम्मान।

निर्भय सक्सेना का योगदान केवल पत्रकारिता तक सीमित नहीं है। वे विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और जनकल्याणकारी गतिविधियों से भी जुड़े रहे हैं। समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों की समस्याओं को उन्होंने न केवल अपनी खबरों के माध्यम से उठाया बल्कि कई मौकों पर सक्रिय भागीदारी भी निभाई। उनका मानना रहा है कि पत्रकारिता का उद्देश्य केवल सूचना देना नहीं बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव की चेतना पैदा करना भी है।

माननीय राज्यपाल संतोष गंगवार को पत्रिका भेंट करते हुए।

आज जब मीडिया तेजी से डिजिटल हो रहा है और खबरों की रफ्तार पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है, ऐसे समय में निर्भय सक्सेना जैसे वरिष्ठ पत्रकार नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उनका लंबा अनुभव बताता है कि पत्रकारिता में सफलता केवल तकनीक या लोकप्रियता से नहीं, बल्कि ईमानदारी, विश्वसनीयता और समाज के प्रति प्रतिबद्धता से मिलती है।

कोटा राजस्थान में पत्रकार सम्मेलन की एक तस्वीर।

51 वर्षों का पत्रकारिता जीवन केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि बरेली की पत्रकारिता की अमूल्य धरोहर है। निर्भय सक्सेना ने अपनी कलम के माध्यम से समाज, संस्कृति और जनसरोकारों को आवाज दी है। उनका सफर यह साबित करता है कि समय बदल सकता है, माध्यम बदल सकते हैं, लेकिन सच्ची पत्रकारिता के मूल्य कभी नहीं बदलते।आज भी उनकी कलम उतनी ही सक्रिय है, जितनी पांच दशक पहले थी। यही उनकी सबसे बड़ी पहचान और उपलब्धि है

कार्यक्रम की कवरेज के दौरान निर्भय सक्सेना।

निर्भय सक्सेना ने अपने 51 वर्षों के पत्रकारिता जीवन में देश और प्रदेश की अनेक प्रमुख राजनीतिक हस्तियों की रिपोर्टिंग की है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्रियों इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और विश्वनाथ प्रताप सिंह (वी.पी. सिंह) के कार्यक्रमों को कवर किया। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों नारायण दत्त तिवारी, मुलायम सिंह यादव, मायावती, कल्याण सिंह और अखिलेश यादव की राजनीतिक गतिविधियों और जनसभाओं की भी व्यापक रिपोर्टिंग की। साथ ही उन्होंने अनेक केंद्रीय मंत्रियों, राज्यपालों, सांसदों, विधायकों, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, साहित्यकारों, समाजसेवियों और सांस्कृतिक हस्तियों के साक्षात्कार एवं समाचारों को प्रमुखता से प्रकाशित कर जनसरोकारों को आवाज दी। यही कारण है कि निर्भय सक्सेना को बरेली की पत्रकारिता का एक विश्वसनीय और सम्मानित चेहरा माना जाता है।

पूर्व मंत्री के साथ साथ में उपजा प्रेस क्लब के महासचिव फ़िरासत हुसैन a सचिव फहीम करार
होली मिलन समारोह में बधाई व शुभकामनाएं देते हुए।

निर्भय सक्सेना की पत्रकारिता क्षमता पर दैनिक जागरण प्रबंधन को इतना विश्वास था कि वर्ष 1987 में उन्हें राजा कर्ण सिंह के पुत्र तथा माधवराव सिंधिया की पुत्री के विवाह समारोह की विशेष कवरेज का महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया। उस समय इस भव्य आयोजन को देशभर में ‘शाही विवाह’ के रूप में देखा गया था। निर्भय सक्सेना ने इस प्रतिष्ठित समारोह की रिपोर्टिंग अत्यंत प्रभावी ढंग से की, जिसके कारण उनकी पहचान एक सक्षम और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में और अधिक मजबूत हुई।

निर्भय सक्सेना ने पत्रकारिता सफर में दैनिक आज, दैनिक जागरण, अमर उजाला, राष्ट्रीय सहारा, जनमोर्चा और स्वतंत्र भारत जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में कार्य किया। निष्पक्ष, जनपक्षधर और खोजी पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले निर्भय सक्सेना ने बरेली और आसपास के क्षेत्रों की सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से उठाया। वर्तमान में भी वे लेखन और पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए गंभीर न्यूज़ से जुड़े हैं।

सूचना विभाग उप्र द्वारा जारी आई कार्ड।
आगरा में पत्रकार सम्मेलन में शामिल पत्रकार निर्भय सक्सेना

पत्रकारिता के साथ-साथ निर्भय सक्सेना समाजसेवा में भी अग्रणी रहे हैं। उन्होंने अब तक 54 बार स्वैच्छिक रक्तदान कर मानव सेवा का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया है। रक्तदान के लिए उन्हें आईएमए सहित विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है।

‘कलम बरेली की’ मंत्री डॉ अरुण सक्सेना को भेंट करते हुए।

स्थानीय इतिहास, समाज और व्यक्तित्वों को सहेजने के उद्देश्य से निर्भय सक्सेना अब तक ‘कलम बरेली की’ के छह वार्षिक अंक प्रकाशित कर चुके हैं। इन अंकों को पाठकों और साहित्यिक जगत में व्यापक सराहना मिली है।

निर्भय सक्सेना ने पत्रकार सुरक्षा कानून, वेज बोर्ड, प्रेस की स्वतंत्रता और पत्रकारों के अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष किया। उपजा और नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स इंडिया के विभिन्न पदों पर रहते हुए उन्होंने पत्रकारों की आवाज को मजबूती से उठाया।

शायर वसीम बरेलवी के साथ वरिष्ठ पत्रकार निर्भय सक्सेना।

यू.पी. जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन (उपजा) की बरेली इकाई को मजबूत बनाने में निर्भय सक्सेना की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वर्ष 1985 में न्यू सुभाष मार्केट स्थित सिंघल पुस्तकालय परिसर में उपजा को कार्यालय उपलब्ध कराने के प्रयासों में उन्होंने अपने साथियों के साथ सक्रिय योगदान दिया। इस कार्यालय का उद्घाटन 28 फरवरी 1985 को तत्कालीन मंडलायुक्त अनादि नाथ सैगल ने किया था।

प्रेस क्लब बरेली में स्वतंत्रता दिवस पर एक कार्यक्रम में।

पत्रकारों के परिवारों को आवासीय सुविधा दिलाने के उद्देश्य से उपजा द्वारा चलाए गए अभियान में भी निर्भय सक्सेना अग्रणी रहे। उनके और साथियों के प्रयासों से बरेली के प्रियदर्शिनी नगर में प्रदेश की पहली पत्रकार कॉलोनी स्थापित हुई, जो पत्रकार एकता और संगठन की बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।

निर्भय सक्सेना उपजा बरेली के महामंत्री, प्रदेश मंत्री और दो बार प्रदेश उपाध्यक्ष रह चुके हैं। इसके अलावा नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स इंडिया (एनयूजेआई) की कार्यपरिषद के सदस्य तथा पत्रकारिता स्कूल की गवर्निंग बॉडी में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। वर्तमान में भी वे संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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