172 करोड़ से अधिक की लागत से हाईटेक बनी जेल, क्षमता 1185 से बढ़कर 2575 हुईमहिला कारागार, हाई सिक्योरिटी बैरक, CCTV निगरानी और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा तैयार
बरेली। करीब दस वर्षों से बंद पड़ी बरेली की ऐतिहासिक जिला जेल में इसी सप्ताह फिर से चहल-पहल शुरू होने जा रही है। कलेक्ट्रेट के निकट स्थित 68.15 एकड़ क्षेत्र में फैली इस जेल का व्यापक जीर्णोद्धार कार्य लगभग पूरा हो चुका है और शासन से बंदियों की शिफ्टिंग के आदेश भी प्राप्त हो गए हैं।
लगभग 186.24 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित इस जिला कारागार में अब 2575 विचाराधीन बंदियों को रखने की क्षमता होगी, जबकि पहले यह क्षमता 1185 बंदियों तक सीमित थी। जेल परिसर में अत्याधुनिक सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी कैमरे, आधुनिक पाकशाला, कंप्यूटराइज्ड कार्यालय, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम और हाई सिक्योरिटी बैरक तैयार कर दिए गए हैं।
जल्द होंगे विचाराधीन बंदी शिफ्ट
जेल प्रशासन के अनुसार केसरपुर स्थित केंद्रीय कारागार-2 में निरुद्ध विचाराधीन बंदियों को शीघ्र ही नई जिला जेल में स्थानांतरित किया जाएगा। जेल अधीक्षक आलोक शुक्ला ने बताया कि शासन द्वारा स्टाफ की तैनाती और शिफ्टिंग संबंधी आदेश जारी किए जा चुके हैं तथा इसी सप्ताह जेल में गतिविधियां शुरू होने की संभावना है।
महिला कारागार भी होगा सक्रिय
नई जिला जेल परिसर में महिला बंदियों के लिए अलग कारागार बनाया गया है जिसकी क्षमता 60 बंदियों की है। इसके अलावा किशोर बंदियों और पुरुष बंदियों के लिए अलग-अलग बैरक तैयार की गई हैं।
हाई सिक्योरिटी बैरक में रखे जाएंगे खूंखार बंदी
जेल परिसर में 12 अत्यंत संवेदनशील और खूंखार बंदियों को रखने के लिए विशेष हाई सिक्योरिटी बैरक बनाई गई है। पूरी जेल पर सीसीटीवी कैमरों की निगरानी रहेगी।अंग्रेजों के दौर की ऐतिहासिक जेलवर्ष 1841 में ब्रिटिश शासनकाल में स्थापित यह जिला जेल करीब 185 वर्ष पुरानी है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अनेक क्रांतिकारी और स्वतंत्रता सेनानी यहां बंद रहे। रुहेला सरदार खान बहादुर खान को भी इसी जेल में फांसी दी गई थी और उनकी मजार आज भी जेल परिसर के निकट मौजूद है।
यूपी का पहला चार जेलों वाला जिला बना बरेली
बरेली अब उत्तर प्रदेश का पहला ऐसा जिला है जहां चार कारागार हैं। इनमें इज्जतनगर स्थित केंद्रीय कारागार, भुता स्थित केंद्रीय कारागार-2, पुनर्निर्मित जिला कारागार तथा किशोर सदन शामिल हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद दोनों केंद्रीय कारागारों में मुख्य रूप से सजायाफ्ता कैदी रखे जाएंगे जबकि जिला जेल में विचाराधीन बंदियों को रखा जाएगा।
बढ़ी सुविधाएं, आधुनिक बनेगा कारागार
नई जिला जेल में बंदियों के लिए खेल मैदान, स्कूल, आधुनिक रसोईघर, अस्पताल जैसी सुविधाएं भी विकसित की गई हैं। सुरक्षा और निगरानी के लिए करोड़ों रुपये की लागत से आधुनिक उपकरण लगाए गए हैं।
करीब एक दशक बाद ऐतिहासिक जिला जेल के पुनः शुरू होने से न केवल जेल प्रशासन को राहत मिलेगी बल्कि बंदियों के बेहतर प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
निर्भय सक्सेना बरेली के वरिष्ठ पत्रकार, लेखक एवं समाजसेवी हैं। वे लंबे समय से जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते रहे हैं। सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक और जनहित के कार्यक्रमों की निष्पक्ष रिपोर्टिंग उनकी पहचान है। पत्रकारिता के साथ-साथ वे विभिन्न सामाजिक एवं साहित्यिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
समाज में जागरूकता, संवाद और सकारात्मक परिवर्तन के लिए उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है
निर्भय सक्सेना बरेली के वरिष्ठ पत्रकार, लेखक एवं समाजसेवी हैं। वे लंबे समय से जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते रहे हैं। सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक और जनहित के कार्यक्रमों की निष्पक्ष रिपोर्टिंग उनकी पहचान है। पत्रकारिता के साथ-साथ वे विभिन्न सामाजिक एवं साहित्यिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
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