बरेली: मुख्यमंत्री ग्रिड योजना पर उठे सवाल, स्मार्ट सिटी की कई योजनाएं अब भी अधूरी

बरेली में स्मार्ट सिटी और मुख्यमंत्री ग्रिड योजना की कई परियोजनाओं पर सवाल उठ रहे हैं। संकरी सड़कें, अधूरी योजनाएं, मेट्रो प्रोजेक्ट और एक छत के नीचे सरकारी कार्यालयों की मांग चर्चा में है।

संकरी सड़कों, अनुपयोगी परियोजनाओं और विभागीय समन्वय की कमी पर चिंता

बरेली। मुख्यमंत्री ग्रिड योजना के अंतर्गत शहर में विकसित की जा रही सड़कों और स्मार्ट सिटी परियोजनाओं को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। मॉडल टाउन और डीडीपुरम क्षेत्रों में अत्यधिक चौड़े फुटपाथों के कारण सड़कें संकरी हो गई हैं, जिससे यातायात प्रभावित हो रहा है। वहीं दामोदर स्वरूप पार्क के सामने लगाए गए सुनहरे हवाई घोड़ों की संरचना से भी चौराहा और अधिक तंग हो गया है।

स्मार्ट सिटी की कई योजनाएं अधर में

स्मार्ट सिटी घोषित हुए वर्षों बीत जाने के बावजूद शहर में पार्किंग, कूड़ा निस्तारण और कई अन्य मूलभूत परियोजनाएं अभी तक पूर्ण नहीं हो सकी हैं। जिलाधिकारी आवास के आसपास आज भी लोगों को सड़क किनारे वाहन खड़े करने पड़ते हैं। करोड़ों रुपये की लागत से बनी हाइड्रोलिक पार्किंग भी उपयोग न होने से धूल फांक रही है।

सेटेलाइट क्षेत्र में नई परियोजनाओं पर संशय

सेटेलाइट चौराहे पर वाई-शेप फ्लाईओवर, नए बस अड्डे और नालों को कवर करने की लगभग 500 करोड़ रुपये की योजनाएं प्रस्तावित हैं। इसके अतिरिक्त इस मार्ग को वीवीआईपी कॉरिडोर बनाने के लिए 115 करोड़ रुपये की योजना भी तैयार की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि विभिन्न परियोजनाओं के बीच समन्वय के अभाव में भविष्य में पुनर्निर्माण और अतिरिक्त खर्च की स्थिति बन सकती है।

मेट्रो, रिंग रोड और अन्य परियोजनाएं भी लंबित

बरेली मेट्रो परियोजना की रिपोर्ट अभी भी प्रस्तुतीकरण की प्रतीक्षा में है। मेट्रो डिपो के लिए भूमि और एनओसी संबंधी अड़चनों के चलते योजना आगे नहीं बढ़ पा रही है। वहीं रिंग रोड परियोजना भी धीमी गति से चल रही है।एक छत के नीचे सरकारी कार्यालयों की मांगलेख में सुझाव दिया गया है कि बिजली विभाग, शिक्षा विभाग और अन्य प्रमुख सरकारी कार्यालयों को एक ही परिसर में स्थापित किया जाए। रामपुर बाग, कंपनी बाग और अन्य सरकारी परिसरों की निष्प्रयोज्य भूमि पर बहुमंजिला कार्यालय, आवासीय टावर और भूमिगत पार्किंग विकसित की जा सकती है। इससे जनता को सुविधा मिलने के साथ सरकारी राजस्व की भी बचत होगी।

मुख्यमंत्री के निर्देशों पर अब तक नहीं हुई कार्रवाई

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 1 अप्रैल 2025 को बरेली में सभी प्रमुख सरकारी कार्यालयों को एक छत के नीचे लाने के निर्देश दिए थे। हालांकि एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी इस दिशा में कोई ठोस पहल दिखाई नहीं दी है। जून 2026 के तीसरे सप्ताह में मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौरे को देखते हुए इस मुद्दे पर फिर चर्चा तेज हो गई है।

सुझावों पर कार्रवाई की उम्मीद

स्वतंत्र पत्रकार एवं नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स इंडिया (एनयूजेआई) उत्तर प्रदेश के प्रदेश उपाध्यक्ष निर्भय सक्सेना ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर सूचना संकुल, प्रेस क्लब, सार्वजनिक पुस्तकालय, मल्टी-लेवल पार्किंग और समन्वित विकास योजनाओं की मांग की है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री जनहित के इन सुझावों पर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश देंगे।

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