बंगला खाली न करने की शिकायत पर बोले चंद्रचूड़

नई दिल्ली।
सरकारी आवास को तय अवधि से अधिक समय तक इस्तेमाल करने को लेकर उठे विवाद के बीच भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ ने सफाई दी है। उन्होंने कहा है कि उन्होंने सामान बांध लिया है और जल्द ही नए किराए के घर में परिवार के साथ शिफ्ट हो जाएंगे।
पूर्व CJI चंद्रचूड़ इस वक्त पत्नी कल्पना और दो दिव्यांग बेटियों, प्रियंका और माही के साथ 5, कृष्ण मेनन मार्ग स्थित प्रधान न्यायाधीश के आधिकारिक आवास में रह रहे हैं। उन्होंने बताया कि बेटियां ‘नेमालाइन मायोपैथी’ नामक दुर्लभ आनुवांशिक बीमारी से पीड़ित हैं, जिसके कारण उन्हें विशेष देखभाल और व्हीलचेयर-अनुकूल घर की ज़रूरत है।
पूर्व न्यायाधीश ने एक समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा, “हमने सामान बांध लिया है। कुछ सामान नए घर भेजा जा चुका है और कुछ फिलहाल स्टोर में रखा है। हम जैसे ही सूचना मिलेगी कि किराए का घर तैयार है, वहां चले जाएंगे।”
उन्होंने कहा कि उनकी बेटियों को लगातार मेडिकल निगरानी की ज़रूरत होती है। एक बेटी को सांस लेने के लिए ट्रैकियोस्टोमी ट्यूब लगी है और निगलने में भी कठिनाई होती है। उनके लिए विशेष नर्सिंग और स्वच्छ वातावरण बनाए रखना जरूरी है।
उन्होंने कहा, “मैं अपनी भावनाएं शब्दों में नहीं बता सकता, लेकिन समझा जा सकता है कि एक पिता के रूप में कैसा महसूस करता हूं।”
पूर्व CJI चंद्रचूड़ ने यह भी कहा कि पूर्व प्रधान न्यायाधीश यू.यू. ललित और एन.वी. रमण को भी आधिकारिक आवास में रहने के लिए विस्तार मिला था और ऐसे निर्णय मुख्य न्यायाधीश के विवेक पर निर्भर होते हैं।
चंद्रचूड़ ने बताया कि सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने अपने पूर्व आवास 14, तुगलक रोड में वापस लौटने की इच्छा जताई थी, लेकिन तत्कालीन CJI संजीव खन्ना ने उन्हें 5, कृष्ण मेनन मार्ग पर ही रहने के लिए कहा, क्योंकि वे खुद वह बंगला नहीं लेना चाहते थे।
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर यह बंगला वापस लेने की मांग की थी। पत्र में कहा गया कि पूर्व CJI निर्धारित छह महीने की अवधि (जो 31 मई को खत्म हो गई) से अधिक समय तक वहां रह रहे हैं, जो सुप्रीम कोर्ट जज संशोधन नियम, 2022 के तहत नियम 3बी का उल्लंघन है।
अब पूर्व न्यायाधीश ने साफ किया है कि वे विवाद से आहत हैं, लेकिन जल्द ही नई जगह शिफ्ट हो जाएंगे।

