बाप घर के दरख़्त होते हैं: फादर्स डे स्पेशल

फादर डे

फादर्स डे विभिन्न देशों में विभिन्न तिथियों पर मनाया जाता है, लेकिन आमतौर पर यह जून के तीसरे रविवार को मनाया जाता है।

फादर्स डे का मनाना हमारे पिताजी को सम्मानित करने और उनकी महत्वपूर्णता को प्रकट करने का एक विशेष अवसर है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि हमारे पिताजी हमारे जीवन में कितने महत्वपूर्ण होते हैं और हमारे विकास में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार करना चाहिए।

फादर्स डे का आयोजन विभिन्न कारणों से किया जाता है। यह एक अवसर है जब हम अपने पिताजी के सामरिक और आर्थिक संघर्षों को मान्यता देते हैं और उनके बड़े संघर्षों और संघर्षों की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार करते हैं। यह हमें याद दिलाता है कि पिताजी हमारे जीवन के एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं, जो हमें नेतृत्व, प्रेरणा और गुणवत्ता की मिसाल प्रदान करते हैं।

इसके अलावा, फादर्स डे एक मौका प्रदान करता है हमें अपने पिताजी के साथ समय बिताने का। यह हमारे पिताजी के साथ अच्छे संबंध और बनाए रखने का अवसर होता है और हमें उनके साथ विचारों, अनुभवों और बातचीत का साझा करने का अवसर मिलता है।

फादर्स डे एक ऐसा दिन है जब हम पिताजी के सामरिक योगदान, परिश्रम, और प्यार को स्वीकार करते हैं और उन्हें यह बताते हैं कि हम उनकी प्रेम, संघर्ष और सहायता की कीमत को समझते हैं।

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पिता पर कुछ मशहूर शेर

हमें पढ़ाओ न रिश्तों की कोई और किताब

पढ़ी है बाप के चेहरे की झुर्रियाँ हम ने 

मेराज फ़ैज़ाबादी
बेटियाँ बाप की आँखों में छुपे ख़्वाब को पहचानती हैं 

और कोई दूसरा इस ख़्वाब को पढ़ ले तो बुरा मानती हैं 

इफ़्तिख़ार आरिफ़
ये सोच के माँ बाप की ख़िदमत में लगा हूँ 

इस पेड़ का साया मिरे बच्चों को मिलेगा 

मुनव्वर राना
मुझ को छाँव में रखा और ख़ुद भी वो जलता रहा 

मैं ने देखा इक फ़रिश्ता बाप की परछाईं में 

अज्ञात
उन के होने से बख़्त होते हैं 

बाप घर के दरख़्त होते हैं 

अज्ञात
घर की इस बार मुकम्मल मैं तलाशी लूँगा 

ग़म छुपा कर मिरे माँ बाप कहाँ रखते थे 

साजिद जावेद साजिद
अज़ीज़-तर मुझे रखता है वो रग-ए-जाँ से 

ये बात सच है मिरा बाप कम नहीं माँ से 

ताहिर शहीर
मुद्दत के बाद ख़्वाब में आया था मेरा बाप 

और उस ने मुझ से इतना कहा ख़ुश रहा करो 

अब्बास ताबिश
मुझ को थकने नहीं देता ये ज़रूरत का पहाड़ 

मेरे बच्चे मुझे बूढ़ा नहीं होने देते 

मेराज फ़ैज़ाबादी
बच्चे मेरी उँगली थामे धीरे धीरे चलते थे 

फिर वो आगे दौड़ गए मैं तन्हा पीछे छूट गया 

ख़ालिद महमूद
देर से आने पर वो ख़फ़ा था आख़िर मान गया 

आज मैं अपने बाप से मिलने क़ब्रिस्तान गया 

अफ़ज़ल ख़ान
सुब्ह सवेरे नंगे पाँव घास पे चलना ऐसा है 

जैसे बाप का पहला बोसा क़ुर्बत जैसे माओं की 

हम्माद नियाज़ी

पिता पर शायरी प्रस्तुत कर रहा हूँ:

  1. आपकी मुस्कान, मेरी खुशियों का कारण है, पिताजी, आप हैं मेरे जीवन का महान हैं।
  2. आपकी ममता, आपका स्नेह अद्वितीय है, पिताजी, आपके बिना जीवन अधूरा है।
  3. आपके संघर्ष, आपकी मेहनत निर्माता है, पिताजी, आप हैं मेरे सपनों का सहारा हैं।
  4. पिता हैं आप सदा साथ, हमेशा आपकी खुशियों के राग, धन्यवाद पिताजी, आप हो मेरे जीवन के महान टैग।
  5. पिता के प्यार में छिपी है अनमोली चिंगारी, उनका सहारा है हर समस्या की पहेली सुलझाने का कारी।
  6. पिताजी, आपकी मार्गदर्शन सदैव अमर रहेगी, आपकी प्रेम भरी बातों से हमेशा भरी रहेगी।
  7. आपकी हर मुसीबत में दिखाई देती है पासवानी, पिताजी, आप हो सच्ची महानता की प्रतिमानी।

ये थी कुछ पिता पर शायरी की बहसा। आशा करता हूँ कि यह आपको पसंद आई होगी।

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