41 लोग घायल, कई इमारतें तबाह
यरूशलेम। ईरान ने इज़राइल के मध्य और उत्तरी हिस्सों पर सैकड़ों मिसाइलें दाग कर बड़ा जवाबी हमला किया है। इस हमले में 41 नागरिक घायल हुए हैं, जिनमें दो की हालत गंभीर बताई जा रही है। इज़राइली आपातकालीन सेवा मैगन डेविड एडोम (MDA) और सेना ने पुष्टि की है कि मिसाइलों से कई रिहायशी इमारतों को नुकसान पहुँचा है।
हमले के दौरान वायु रक्षा सायरन बजते ही लाखों लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागे, जिससे कई शहरों में दहशत फैल गई। इज़राइली सेना (IDF) के प्रवक्ता एफ़ी डेफ़्रिन ने बताया कि अधिकांश मिसाइलों को एयर डिफेंस सिस्टम ने रास्ते में ही नष्ट कर दिया, लेकिन उनके छर्रों से इमारतों को नुकसान हुआ।
इज़राइल के रक्षा मंत्री इज़राइल काट्ज़ ने इस हमले को ईरान की “बड़ी हिमाकत” बताते हुए चेतावनी दी –
“ईरान ने इज़राइली नागरिकों को निशाना बनाकर खतरे की सारी हदें पार कर दी हैं। उसे इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।”
IDF ने ईरानी मीडिया की उस रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें दावा किया गया था कि ईरान ने एक इज़राइली फाइटर जेट को मार गिराया है और उसके पायलट को पकड़ा है।
इसके साथ ही, इज़राइल ने शुक्रवार को ईरान के तबरीज़ एयरबेस समेत कई सैन्य ठिकानों पर हमला किया था। इसमें ईरानी वायु रक्षा प्रणालियां, ड्रोन बेस और मिसाइल लॉन्चर नष्ट कर दिए गए। IDF ने कहा कि वह ज़रूरत पड़ने पर और भी कार्रवाई के लिए तैयार है।
ईरान के दो बड़े जनरल मारे गए
ईरान के सरकारी टेलीविज़न ने पुष्टि की है कि इज़राइली हमलों में ईरानी सेना के दो उच्च रैंकिंग अधिकारी मारे गए हैं —
- जनरल गुलाम रज़ा मेहराबी (खुफिया विभाग)
- जनरल मेहदी रब्बानी (अभियान शाखा)
इससे पहले भी इज़राइल ने अर्धसैनिक बलों और ईरानी सेना के कई शीर्ष अधिकारियों को निशाना बनाया था।

ईरान का कड़ा बयान: “बातचीत अब बेमतलब है”
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माईल बाकेई ने कहा कि इस समय इज़राइल से बातचीत करना “पूरी तरह बेमतलब” है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका की अनुमति के बिना इज़राइल यह हमला कर ही नहीं सकता था। बाकेई ने आगे कहा:
“पिछले कुछ महीनों से अमेरिका के साथ चल रही वार्ताएं अब अर्थहीन हो गई हैं, क्योंकि उन्होंने खुद ही ईरान पर हमला करने वालों का समर्थन किया है।”
निष्कर्ष
ईरान और इज़राइल के बीच टकराव अब बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुँच चुका है। दोनों देशों के बीच सीधा सैन्य संघर्ष शुरू हो चुका है, और इसका असर सिर्फ पश्चिम एशिया ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्थिरता पर भी पड़ सकता है।

