बालमन के चितेरे निरंकार देव सेवक का मनाया गया 106वीं जन्मदिन
निरंकार देव सेवक एक प्रखर चेतना के कवि रहे हैं। उनके समग्र साहित्य को पुनर्प्रकाशित करने की आवश्यकता है। हम उनके कर्ज़दार हैं। यह कर्ज हमको उनके विचारों को आगे बढ़ाकर उतारना चाहिए। यह बातें मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार चंद्रकांत त्रिपाठी ने निरंकार देव सेवक के 106वीं जयंती पर कहीं।
बालमन के चितेरे निरंकार देव सेवक का जन्मदिन उनके निवास पर मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ निरंकार देव सेवक के चित्र पर माल्यर्पण कर किया गया। पुत्रवधू पूनम सेवक ने सेवक जी के जीवन के कई अनछुए पहलुओं पर प्रकाश डाला और उनकी लिखी रचनाएं सुनाईं।

कार्यक्रम के अध्यक्ष वरिष्ठ गीतकार रमेश गौतम ने कहा कि सेवक जी बच्चों को सीधे-सीधे उपदेश देने के पक्षधर नहीं थे। उनकी कविताएं समाज पर तंज कसती है। उनकी कविताओं में एक चुटीला अंदाज है, जो बच्चे पसंद करते हैं।
विशिष्ट अतिथि उपजा प्रेस क्लब के अध्यक्ष डॉ पवन सक्सेना ने कहा कि उनकी पत्रकारिता में आने का प्रेरणा पुंज निरंकार देव सेवक ही रहे हैं। जब वह बचपन में सेवक जी के घर आते थे तो अख़बारी दुनिया से सबसे पहले परिचय उनके घर पर ही हुआ था। सेवक जी के विचारों को हमें फिर से प्रदीप्त करने की जरूरत है।
वरिष्ठ पत्रकार वीरेंद्र अटल ने कहा कि कुछ लोग उन्हें खास फ्रेम में बांधने की कोशिश करते हैं,जबकि उनकी रचनाएं बाल साहित्य की युगद्रष्टा हैं।
तितली सोसायटी के सचिव फहीम करार ने कहा कि सेवक जी के नाम पर प्रशासन व शासन को आगे बढ़कर आना चाहिए। रुहेलखंड विश्वविद्यालय में सेवक जी की पीठ बनना चाहिए और उसमें शोध कार्य होने चाहिए।
कार्यक्रम में पत्रकार मुकेश तिवारी, श्रेयांश श्रीवास्तव, वरिष्ठ पत्रकार खान एफ रहमान आदि शामिल हुए।
ऋचा श्रीवास्तव ने सभी का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन फहीम क़रार ने किया।

