यह निर्णय गरीब और वंचित तबकों के बच्चों की शिक्षा छीनने जैसा

प्रदेश भर में सरकारी विद्यालयों के मर्जर के फैसले के खिलाफ विरोध तेज हो गया है। सोमवार को परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास) ने बरेली कलेक्ट्रेट गेट पर सभा कर सरकार के निर्णय का कड़ा विरोध जताया और प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा।

विद्यालय मर्जर के खिलाफ पछास ने की विरोध सभा, प्रधानमंत्री को सौंपा ज्ञापन

बरेली. प्रदेश भर में सरकारी विद्यालयों के मर्जर के फैसले के खिलाफ विरोध तेज हो गया है। सोमवार को परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास) ने बरेली कलेक्ट्रेट गेट पर सभा कर सरकार के निर्णय का कड़ा विरोध जताया और प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा।

सभा को संबोधित करते हुए पछास की दिशा ने कहा कि योगी सरकार द्वारा किए जा रहे विद्यालयों के मर्जर के पीछे शिक्षा से पीछे हटने की मंशा छिपी है। यह निर्णय गरीब और वंचित तबकों के बच्चों की शिक्षा छीनने जैसा है, जो न केवल बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है बल्कि संविधान द्वारा प्रदत्त शिक्षा के मौलिक अधिकार का भी उल्लंघन है।

“छात्र-युवा विरोधी है मर्जर नीति”
पछास के शहर सचिव कैलाश ने मर्जर नीति को छात्र और युवा विरोधी बताते हुए कहा कि यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की छात्र विरोधी सोच का हिस्सा है, जिसके तहत आस-पास के स्कूलों को मिलाकर क्लस्टर बनाए जा रहे हैं। इसका सीधा असर लाखों शिक्षकों की नौकरियों और युवाओं के रोजगार अवसरों पर पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि स्कूलों के बंद होने से न केवल मौजूदा शिक्षकों का भविष्य संकट में आएगा, बल्कि भविष्य में भर्तियों के अवसर भी खत्म हो जाएंगे। इससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए स्थायी नौकरियों के दरवाज़े और अधिक संकुचित हो जाएंगे।

प्रशासन को ज्ञापन सौंपते पछास के पदाधिकारी व छात्र

“बेटियों की शिक्षा पर पड़ेगा सबसे बुरा असर”
पछास की सदस्य निशा ने कहा कि विद्यालय मर्जर से खासतौर पर गांवों की छात्राओं की पढ़ाई बाधित होगी। छोटे-छोटे बच्चों के लिए दूर के स्कूलों तक जाना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने सरकार पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा, “एक ओर सरकार ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा देती है, वहीं दूसरी ओर उन्हीं बेटियों की पढ़ाई के रास्ते बंद कर रही है।”

ज्ञापन में रखी गई ये मांगे
प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन में पछास ने निम्नलिखित मांगें रखीं—

  1. विद्यालय मर्जर (बंद करने) के आदेश को तत्काल रद्द किया जाए।
  2. छात्र विरोधी राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को वापस लिया जाए।
  3. शिक्षा के निजीकरण पर रोक लगाकर सभी के लिए निःशुल्क, समान, वैज्ञानिक और तार्किक शिक्षा की गारंटी दी जाए।

ज्ञापन की एक प्रति उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को भी प्रेषित की गई है।

सभा में शामिल रहे कई छात्र-छात्राएं
सभा और ज्ञापन कार्यक्रम में साक्षी, वैष्णवी, हर्षिता, रजत, मोहित, रामसेवक, बालकराम सहित कई छात्र-छात्राएं शामिल रहे। संगठन ने भविष्य में इस मुद्दे पर व्यापक आंदोलन की चेतावनी भी दी है।

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