स्कूल मर्जर को मंज़ूरी, बच्चों की पढ़ाई बनी रहे: हाईकोर्ट


स्कूल मर्जर पर हाईकोर्ट की मुहर, सरकार को बच्चों की पढ़ाई सुनिश्चित करने का आदेश

लखनऊ, 7 जुलाई 2025
उत्तर प्रदेश में स्कूलों के विलय (मर्जर) को लेकर दायर की गई दो बड़ी याचिकाओं को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि राज्य सरकार द्वारा स्कूलों का मर्जर या pairing करना संविधान या शिक्षा के अधिकार कानून (RTE Act) का उल्लंघन नहीं है, लेकिन यह सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रह जाए।

यह फैसला न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने सुनाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भले ही स्कूलों का विलय किया गया हो, लेकिन सरकार की यह संवैधानिक जिम्मेदारी है कि वह सभी बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराए।

क्या था मामला?

याचिका में कहा गया था कि यूपी सरकार ने 16 जून 2025 को आदेश जारी कर 105 स्कूलों को मर्ज किया है, जिससे बच्चों को अपने मौजूदा स्कूल से दूर जाकर पढ़ना पड़ेगा। यह निर्णय, याचिकाकर्ताओं के अनुसार, शिक्षा के अधिकार (Article 21A) और RTE नियमों का उल्लंघन था।

वहीं सरकार ने तर्क दिया कि बहुत से स्कूलों में छात्र संख्या शून्य या बहुत कम है, जिससे संसाधनों की बर्बादी हो रही है। मर्जर से बच्चों को बेहतर सुविधाएं, प्रशिक्षित शिक्षक और बेहतर गुणवत्ता वाली शिक्षा मिल सकेगी।

⚖️ कोर्ट ने क्या कहा?

स्कूलों का मर्जर नई शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के तहत किया गया है, जो शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए है।

यह नीति न तो मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है और न ही मनमानी है।

बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) को निर्देश दिया गया है कि वे सुनिश्चित करें कि सभी बच्चों को पास के स्कूलों में प्रवेश मिले और आवश्यक हो तो मुफ्त परिवहन या आवास की व्यवस्था की जाए।

सरकार को चेतावनी:

कोर्ट ने सरकार से कहा कि मर्जर के बाद भी यह उसकी कानूनी और नैतिक ज़िम्मेदारी है कि कोई बच्चा पढ़ाई से वंचित न हो।

“अगर कोई बच्चा पीछे छूटा, तो इसके लिए सरकार जिम्मेदार मानी जाएगी।”

क्या असर पड़ेगा?

इस फैसले से यूपी सरकार को स्कूलों के समायोजन की योजना पर कानूनी मंजूरी मिल गई है। वहीं, BSA और शिक्षा विभाग की जवाबदेही भी बढ़ गई है।
अब देखना होगा कि मर्जर के बाद ग्रामीण और दूरदराज़ के बच्चों तक शिक्षा पहुंचाने में सरकार कितना सफल रहती है।

⚖️ हाईकोर्ट आदेश के मुख्य बिंदु (7 जुलाई 2025):

1. ✅ याचिकाएं खारिज –
कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाई गई आपत्तियाँ कानूनी रूप से ठोस नहीं हैं, इसलिए दोनों याचिकाएं खारिज की जाती हैं।

2. स्कूल मर्जर नीति वैध –
सरकार द्वारा जारी स्कूलों के pairing/mixing का आदेश संविधान के अनुच्छेद 21A (शिक्षा का अधिकार) और RTE Act के प्रावधानों का उल्लंघन नहीं है।

3. हर बच्चे को शिक्षा मिलनी चाहिए –
सरकार की यह जिम्मेदारी तय की गई कि मर्ज के बाद भी हर बच्चे को पास के स्कूल में अनिवार्य और मुफ़्त शिक्षा मिले।

4.  यदि दूरी बढ़े तो सुविधा दी जाए –
अगर मर्जर के कारण बच्चों को दूर जाना पड़े, तो सरकार को फ्री ट्रांसपोर्ट, छात्रावास या अन्य सुविधाएं देनी होंगी (जैसा कि RTE नियम 4(2) में प्रावधान है)।

5.  BSA (बेसिक शिक्षा अधिकारी) की जवाबदेही –
हर जिले के BSA को यह सुनिश्चित करना होगा कि मर्जर के बाद कोई बच्चा छूटे नहीं, और सभी को समय से प्रवेश और संसाधन मिलें।

6. नीति का उद्देश्य संसाधनों का बेहतर उपयोग
कोर्ट ने माना कि कई स्कूलों में छात्र संख्या बहुत कम या शून्य है, इसलिए संघटन (pairing) करना तर्कसंगत है, जिससे शिक्षकों, भवनों और सुविधाओं का बेहतर उपयोग हो सके।

7.  सरकार को चेतावनी –
यदि मर्जर के कारण बच्चों की शिक्षा बाधित हुई या कोई बच्चा छूटा, तो सरकार की जिम्मेदारी होगी और वह उत्तरदायी मानी जाएगी।

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